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Essay On Holi In Hindi | Essay On Holi In Hindi For Class 5 |

Essay On Holi In Hindi

Essay On Holi In Hindi – Namskar dosto, aap sabhi ko holi ki Hardik shubh kamnaye. Ye holi aapke life mai bahut sare khushiyon ke colours Bhar de. Log holi par essay bolna pasand karte hai. Essay On Holi In Hindi ye article humne aapke liye likha hai. Taki aap hamare article ki help se holi par essay bol sake.

Dosto Essay On Holi In Hindi Article ko padhna shuru karte hai………………

Essay On Holi In Hindi

Essay On Holi In Hindi

होली भारत देश का एक प्रमुख त्योहार है इसे रंगों का त्योहार भी कहा जाता है | कि इस दिन बच्चे रंगों से खेलते हैं और बड़ों के आशीर्वाद लेते हैं और इस दिन को बहुत ही अच्छे से मनाया जाता है | माना जाता है कि होली का त्यौहार भारतवर्ष में बहुत ही टाइम पहले से मनाया जा रहा है। होली के त्योहार के बारे में हमारी स्कूल के बच्चों को भी बताया जाता है कि किस तरह से होली को मनाते हैं और किस तरफ से होली कब मनाया जाता है और इसका रीजन किया है।

होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्द कहानी है प्रहलाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। अपने पुत्र प्रहलाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया | कि प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठे। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकश्यप के आदेशानुसार आग में बैठने पर होलिका तो जल गई पर प्रहलाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रहलाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है।

ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं।

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होलिका दहन वाले दिन ही सभी लोग रंगों की होली खेलते है जिसे दुल्हैड़ी या रंगवाली होली भी कहा जाता है. ये दिन सभी के जीवन में ऐसा आता है जिस दिन बच्चे, बूढ़े, जवान, सभी लोग अपने गिले सिकबे भूलकर होली के त्यौहार को मिलकर मनाते है. एक दूसरे पर गुलाल और सभी तरह के रंग डालते है. भारत में ब्रज की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. ब्रज जैसी होली भारत के किसी भी कोने में नहीं मनाई जाती. ब्रज की होली को देखने देश विदेश से लोग आते है और होली के पावन पर्व की खुशियाँ और रंगत देखकर ख़ुशी से दंग रह जाते है.

होलिका दहन के बाद से ही रंग खेलना सुरु कर देते है. सभी के चहरे रंग-बिरंगे नजर आते है. देखने में वातावरण बहुत ही शानदार और रंगीन दिखाई पड़ता है. दोपहर बाद सभी रंग खेलकर नए वस्त्र पहनते है. आस पास होली खेलने के बाद अपने रिश्तेदारों के यहाँ होली मिलने और उनके साथ होली खेलने जाते है.

 

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होली का त्यौहार रंगों का त्यौहार होने के साथ साथ बुराई ख़तम होने और अच्छाई का जन्म लेने का दिन भी होता है| इस दिन मीठे पकवान में रसगुल्ले, जलेबी, दही बड़े, खाजा और भी पकवान बनते है| यह त्यौहार वसंत पंचमी के आते ही शुरू हो जाता है और पुरे फाल्गुन मॉस चलता है.

फाल्गुन मास में खेतो में सरसों उगती है| सरसों की खूशबू फाल्गुण के महीने को और भी ज्यादा आकर्षक बनाती है इस दिन फाग और धमार का गाना प्रारम्भ हो जाता है.

होली के जैसे जीवन भी रंगमय होना चाहिए जिसमे प्रत्येक रंग स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। प्रत्येक भूमिका और भावनाए स्पष्ट रूप से परिभाषित होना चाहिए। भावनात्मक भ्रम परेशानी उत्पन्न करता है। आप अपने आप से  कहे कि मैं प्रत्येक भूमिका के साथ न्याय करूँगा। आप प्रत्येक भोमिका निभा सकते है। “ मै अच्छी पत्नी, अच्छा बालक, अच्छा पालक और अच्छा नागरिक हूँ। ” आप ऐसा मान ले कि आप में यह सभी समानताये मौजूद है। यह सभी वास्तव मे आप मे मौजूद है। इसे बस खीलने दीजिए। विविधता में सामंजस्यता जीवन को आनंदमय और रंगमय बना देती है।

उत्सव की अवस्था मे मन अक्सर दैव को भूल जाता है। आपको दिव्यता की उपस्थिति का अनुभव करना चाहिए जिसमे किसी भी किस्म कोई वियोग नहीं होता है। क्या आप अपने आप को इस पृथ्वी, वायु और सागर  का हिस्सा मानते है ? क्या आप इस आस्तित्व मे अपने आप को विलीन होने का अनुभव करते है ? इसे ही दिव्य प्रेम कहते है ! दिव्यता को देखने का प्रयास न करे। उसे सिर्फ और सिर्फ मान कर चले। वह वायु के जैसे मौजूद है। आप श्वास के द्वारा वायु को लेकर उसे छोड़ देते है।

 

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Essay On Holi In Hindi For Class 5

प्रस्तावना

होली एक रंगों से भरा और महत्वपूर्ण उत्सव है भारत में। इसे हर साल हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा मार्च (फागुन) महीने के पूर्णिमा या पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है। लोग इस पर्व का इंतजार बड़ी उत्सुकता पूर्वक करते है और उस दिन इसे लजीज पकवानों और रंगों के साथ मनाते है। बच्चे सुबह ही रंगों और पिचकारियों के साथ अपने दोस्तों के बीच पहुँच जाते है और दूसरी तरफ घर की महिलाएं मेहमानों के स्वागत और इस दिन को और खास बनाने के लिये चिप्स, पापड़, नमकीन और मिठाइयाँ आदि बनाती है।

होली का इतिहास

होली एक खुशी और सौभाग्य का उत्सव है जो सभी के जीवन में वास्तविक रंग और आनंद लाता है। रंगों के माध्यम से सभी के बीच की दूरियाँ मिट जाती है। इस महत्वपूर्ण उत्सव को मनाने के पीछे प्रह्लाद और उसकी बुआ होलिका से संबंधित एक पौराणिक कहानी है। काफी समय पहले एक असुर राजा था हिरण्य कश्यप। वो प्रह्लाद का पिता और होलिका का भाई था। उसे ये वरदान मिला था कि उसे कोई इंसान या जानवर मार नहीं सकता, ना ही किसी अस्त्र या शस्त्र से, न घर के बाहर न अंदर, न दिन न रात में। इस असीम शक्ति की वजह से हिरण्य कश्यप घमंडी हो गया था और भगवान के बजाए खुद को भगवान समझता था साथ ही अपने पुत्र सहित सभी को अपनी पूजा करने का निर्देश देता था।

क्योंकि हर तरफ उसका खौफ था, इससे सभी उसकी पूजा करने लगे सिवाय प्रह्लाद के क्योंकि वो भगवान विष्णु का भक्त था। पुत्र प्रह्लाद के इस बर्ताव से चिढ़ कर हिरण्य कश्यप ने अपनी बहन के साथ मिलकर उसे मारने की योजना बनायी। उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने का आदेश दिया। आग से न जलने का वरदान पाने वाली होलिका भस्म हो गई वहीं दूसरी ओर भक्त प्रह्लाद को अग्नि देव ने छूआ तक नहीं। उसी समय से हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा होलिका के नाम पर होली उत्सव की शुरुआत हुई। इसे हम सभी बुराई पर अच्छाई की जीत के रुप में भी देखते है। रंग-बिरंगी होली के एक दिन पहले लोग लकड़ी, घास-फूस, और गाय के गोबर के ढेर में अपनी सारी बुराइयों को होलिका के साथ जलाकर खाक कर देते है।

सभी इस उत्सव को गीत-संगीत, खुशबूदार पकवानों और रंगों में सराबोर होकर मनाते है। इस दिन सभी स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय, कार्यालय, बैंक और दूसरे सभी संस्थान बंद रहते है जिससे लोग इस खास पर्व को एक-दूसरे के साथ मना सके।

कैसे मनाते है होली का त्योहार?

होली को दो पक्षों में मनाया जाता है एक दिन रंगों के साथ खेलते है तो एक दिन होलिका दहन करते है। पहले पक्ष में होलिका दहन होता है। होली के एक दिन पूर्व होलिका दहन हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है। होलिका दहन के पीछे ऐतिहासिक कारण है। होलिका दहन में घरों के बाहर घास-फूस, लकड़ी और गोबर के उपलों को जलाते है। घर की महिलाएं रीती गीत जाती है, और सब आपस में गले मिलकर प्रेम प्रकट करते है।

दूसरे पक्ष में रंगो और पिचकारियों के साथ खेलने का रिवाज है ये त्यौहार बच्चों का लोकप्रिय पर्व है। इस दिन रंग भरे छोटे -छोटे गुब्बारे बच्चों की खुशियां पर चार चाँद लगा देते है।

निष्कर्ष

होलिका दहन के अगले दिन रंगों का त्योहार मनाया जाता है इस दिन बच्चे आपस में एक दूसरे को रंग लगाते हैं और सब की शुभकामनाएं लेते हैं और सब को बधाई देते हैं। होली का त्यौहार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। पूर्णिमा (पूर्ण चन्द्रमा के दिन) पहले दिन के होली को होली पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग एक दुसरे को रंग लगा कर मनाते हैं। दूसरे दिन को पुनो कहते हैं इस दिन मुहूर्त के अनुसार होलिका दहन किया जाता है।

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