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Poem On 26 January In Hindi

Poem On 26 January In Hindi

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Poem On 26 January In Hindi

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Poem On 26 January In Hindi

माह जनवरी छब्बीस को हम
सब गणतंत्र मनाते |
और तिरंगे को फहरा कर,
गीत ख़ुशी के गाते ||

संविधान आजादी वाला,
बच्चो ! इस दिन आया |
इसने दुनिया में भारत को,
नव गणतंत्र बनाया ||

क्या करना है और नही क्या ?
संविधान बतलाता |
भारत में रहने वालों का,
इससे गहरा नाता ||

यह अधिकार हमें देता है,
उन्नति करने वाला |
ऊँच-नीच का भेद न करता,
पण्डित हो या लाला ||

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सब हैं भाई-भाई |
सबसे पहले संविधान ने,
बात यही बतलाई ||

Poem On 26 January In Hindi

 

26 January Republic Day Poetry Messages in Hindi

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मैं भारतमाता का पुत्र प्रतापी,

सीमा की रक्षा करता हूं।

जो आके टकराता है,
अहं चूर भी करता हूं।
दुश्मन की कोई भी,
दाल न गलती।
लड़कर दूर भगाता हूं,
अपने भारत के वीर गीत को,
हर मौके पर गाता हूं।
आतंकवादी अवसरवादी,
आने से टकराते हैं।
आ गए मेरी भूमि में,
तहस-नहस हो जाते हैं।

poem on 26 january in hindi (2)

आओ करे प्रतिज्ञा हम सब
इस पावन गणतन्त्र दिवस पर
हम सब बापू के आदर्शों
को अपनायेगे
नया समाज बनायेंगे

भारत माँ के वीर सपूतों
के बलिदानों को हम
व्यर्थ न जानें देंगे
जाति ,धर्म के भेदभाव से
ऊपर उठकर
नया समाज बनायेंगे

आजादी को मिले हुये
है अब अड़सठ साल
क्या सही मायनों में
हम आजादी के अर्थों
को समझ पायें है

क्या बापू के आदर्शों को
अपना पायें है
अंग्रजो की गुलामी से
निकल कर हम
क्या जाति, धर्म , गरीबी ,भष्टाचार
जैसे मुद्दों से लड़ पाये है

आओ आज करे प्रतिज्ञा हमसब
जो गरीब के घर न जले चूल्हा
तो हम भी निवाला नहीं खायें
बीनता कचरा जो बचपन
हम देखें
रातों को हम भी न सो पायें

शहीद सैनिको के परिवारों को
देख बिलखता
हम भी खामोश न रह पाये
मिलकर साथ आओ हमसब
करे प्रतिज्ञा आज
इस पावन गणतन्त्र दिवस पर
हम बापू के आदर्शों
को अपनाये
नया समाज बनाये

Poem On 26 January In Hindi

Poem On 26 January In Hindi

 

Poem On 26 January In Hindi

 

इस दिन को एक भारतीय सशस्त्र बल परेड द्वारा और बड़े विजय चौक से शुरू होता है और इंडिया गेट पर बंद कर देता है, जो होता है। भारतीय सशस्त्र बल (सेना, नौसेना और वायु-शक्ति) राजपथ पर परेड करते हुए भारत के राष्ट्रपति को प्रणाम करता है। भारतीय सशस्त्र बल परेड के माध्यम से और टैंकों और भारी हथियारों की तरह सभी अपार कृतियों का प्रदर्शन कर भारत के बल दिखा। सशस्त्र बल परेड के बाद भारत से प्रत्येक की स्थिति जीवन और कस्टम के उनके रास्ते दिखा उनके Jhankis प्रदर्शित करता है। उसके बाद, एक सप्ताह में तीन छायांकन (केसर की तरह हमारे उल्लेखनीय राष्ट्रीय ध्वज रंग, हरे और सफेद) फूल वर्षा के विमानों द्वारा आकाश में होता है।

छात्र सामाजिक लड़ाई में मदद करने के लिए लचीलापन वारियर्स, चाल, गायन, नाटकीय रूपांतर खेलते हैं, के कुछ हिस्सों, प्रवचन पढ़ मान, इस तरह के राष्ट्रीय गान गा परेड, ध्वज आरोहण, के रूप में भयानक अवसरों बाहर छँटाई द्वारा स्कूलों और विश्वविद्यालयों में इस दिन मनाता है, परीक्षण प्रतिद्वंद्विता, कागज बहुत आगे प्रकाशन शो, आकर्षण, पैरोडी व्यायाम, और रचना। आज के दिन प्रत्येक भारतीय इस देश को शांत और निर्मित राष्ट्र बनाने के लिए एक शपथ ले जाना चाहिए। अंत की ओर, प्रत्येक डब और मिठाई Namkin हो जाता है और आनन्द अपने घर के लिए चला जाता है।

 

 

Poem On 26 January In Hindi
Republic Day Poetry Messages in Hindi
बस इस तिरंगे की पहचान को देखना….
कभी इन पत्थरों पर चल के देखना…
कभी इस मिट्टी की खुशबू महसूस करके देखना…
है हर चाल मे कितना प्यार, कभी आजमा के देखना…
बॅस इस तिरंगे की पहचान को देखना….
जो अपने प्राणो की बलि चढ़ाई उनके परिवार को देखना…
उन सिपाहियो की माँ के गीले चुनरी के पल्लू को देखना…
उनके घर के किसी कोने मे बुझे दीये की आस को देखना …
उनके आँगन मे गूंजते वन्दे मातरम को सुनना…
बस इस तिरंगे की पहचान को देखना….
थोड़ी दीये की लौ खुद के दिल में भी जलाओ…
किसी के आंसुओं की कीमत तुम भी जानो…
ऐसा कर जाओ की खाली न जाए वो हुई कुर्बानियां…
मिट्टी के हर कण-कण में वन्दे मातरम सुनाई दे जाए…
बस इस तिरंगे की पहचान को देखना….
इसके तीनो रंगो की पहचान को देखना…
एक हाथ मे गीता रखना दूजे हाथ आज क़ुरान रखना…
मज़हब जाती भाषा की दीवार न हो इसका ख्याल रखना…
प्यार और देशभक्ति की चुनर ओढ़े ऐसा हिन्दुस्तान बनाये रखना…
बस इस तिरंगे की पहचान को देखना.
Poem On 26 January In Hindi

सत्य अहिंसा का पाठ पढाता,
हर्षोल्लास भरा गणतंत्र दिवस है।
जागो मेरे भारत के सपूतो,
सोये देश को नई पहचान बनाना है।
नफरत,बुराई बैर मिटा के,
विश्व में भारत को उठाना है।
कुटिल,दुराचारियों एव पापियों का,
कर अंत फिर राम राज्य बनाना है।
भूल चुके जो अपनी संस्कृति को,
उनको सही राह दिखाना है।
जाति मजहब का भेद भुलाकर,
सबको गले लगाना है।
उन्नति के पथ पर देश हमारा,
फिर से सोने की चिड़ियाँ बनाना है।
लेखक ~राजेंद्र कुमार~

देश के कण-कण से और जन-जन से मुझको प्यार है
जिसके दिल से ये सदा आए न वो गद्दार है

अंग अपना ही कभी था रंजिशें जिससे हुईं
लड़ रहे हम युद्ध जिसकी जीत में भी हार है

इश्क ने तेरे मुझे ये क्या बनाकर रख दिया
लौट कर आता उसी चौखट जहाँ दुत्कार है

 

Poem On 26 January In Hindi

 

 

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